गाथा आयुष्याची

गाथा  आयुष्याची 

आयुष्याची एक रीत 
कळतेय  माला 
म्हणूनच  तर  आधार 
देत  आहे  मनाला 

ओघळले  जरी  कधीही 
अश्रु  नयनांतुनी  
गुंफायची  त्या  मोत्यांची 
माळ  रंगीत  धाग्यांतुनी 

खुप  कष्ट  करून  देखील 
जर  नाही  मिळाले  फळ 
अनुभवातून  त्या 
दयायचं  मनाला  बळ 

जेव्हा  नेहमी  नेहमी  
केलेले   श्रम  जाते  व्यर्थ 
समजून  घ्यायचं  संयमाने 
त्यात  असते  काहीतरी  तथ्य 

जे जे  दुःखाच्या  क्षणी 
देतात  आपल्याला  साथ 
आपणही  करायची  मदत  
जसे  दिवा  आणि  वात 

ध्यानी असुदयायचं 
गर्वाच  घर  खालीच  असतं 
एक  मोर  पिस  भेटताच  
मोर  व्हायचं  नसतं 

जेव्हा  जेव्हा  आयुष्यात 
संकटं  येतात 
आपल्याला  पक्क - खंबीर 
करूनच  जातात 

खेळतच  रहायचा 
हा  आयुष्याचा  लपंडाव 
विसरुन  चालणार  नाही 
अनमोल  आयुष्याचा  भाव

                                   -------संध्या  गडगे - सिन्नरकर 




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