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आधार

     आधार  खोड,  फांदया , फळे  अन   फुले  आकार  केवढा  हा  वृक्षाचा  बीज  हे  मात्र  एकच  असतं  आधार  या  सर्वांचा  नात्या - नात्यांतून  राहतात  उभ्या  चार  भिंती  पण  भिंतींना  आधार  असते  घरातील  मोठी  व्यक्ती  नदया -  नाले  वाहतात  घेऊन  किरण  आशेचा  अन  विशाल  समुद्र  बनतो  आधार  या  सर्वांचा  असला  जरीही  आपल्याला  आधार  सर्वांच्या  प्रेमाचा  सगळ्यात  वेगळा  आधार  असतो  फक्त  मायेचा  रंगी - बेरंगी  नात्यांनी  बनतो  धागा  आयुष्याचा  देऊ  त्या  दोरीला  आधार  विश्वासाचा  छोटया - मोठ्या   अनुभवांवरून  अनुभव  घेऊ  जीवनाचा  गाऊ  जीवन  गाणं  घेऊन  आधार  अनुभवांचा  ...
"गुंफण"  एक  दिवस  सुख - दुःखांच्या  अश्रूंची  करून  साठवण  गुंफल्या  त्याच्या  माळा  ओवुनी  धाग्यांत  आठवण  माळेच्या  त्या  मोत्यांचे  रंग  आगळे -वेगळे  कितीही  अश्रूंनी  ते  कधीच  नाही  विरघळले  सुखाच्या  मोत्यांचा  मोरपंखी  रंग  कसा  बळकट  अन  दुःखाच्या  मोत्यांचा  रंग  कसा  फिक्कट  रंगीत  मोत्यांमुळेच  बेरंगी  मोती  दिसतात  बेरंगी  मोत्यांमुळेच  तर  रंगीत  मोती  उठून  दिसतात  आठवणींच्या  धाग्यांना  मोत्यांमुळेच  अर्थ  आला  आठवणींच्या  धाग्यांमुळेच  मोत्यांचा  साज  गुंफला !!!!!             ----- संध्या  गडगे - सिन्नरकर 

☺❤ जीवन ❤ ☺

☺❤ जीवन ❤  ☺ मानवाला असतो   एकच  जन्म , एकच  मृत्यु  मध्यंतरी  घडतं  एक नाटक  जीवन  त्याचं  नाव  जीवनात  कधी  सुख  असतं  जीवनात  कधी  दुःख  असतं  जीवन  कसं  जगायचं  असतं  ते  आपणच  ठरवायचं  असतं  जीवनाच्या  वाटेत  कधी  असतो  भरपूर  अंधार  अंधारातून  शोधायचा  असतो  उदयाचा  प्रकाश  प्रकाशाकडं  झेप  घेत  जायचंच  असतं  जीवन  हे  असंच  असतं  जीवन  असतं  नदीसारखं  वाहताना  असतात  भरपूर  अडथळे  अडथळ्यांवर  मात  करून  समुद्राला  जाऊन  मिळायचं  असतं  जीवनाच्या  वाटेत  कधी  असतात  भरपूर  घाट  ती नागमोडी  वळणे  घेत  शोधायची  असते  यशाची  वाट  यशाच्या मागे  लागायचं  असतं  जीवन  हे...

💗👫💗"ती आणि पाऊस "💗👫💗

 💗👫💗"ती  आणि  पाऊस  "💗👫💗 पाहिलंच  प्रेम  - तुझं  नी  माझं  पहिलीच  भेट  - तुझी  नी  माझी  पहिलीच  नजरानजर  - तुझी नी  माझी  पहिल्यांदाच  हातात  हात  - तुझा  नी  माझा  अशा  ह्या  क्षणी  आलेला  पाऊस ....  ढगांचा  गडगडाट....  नी  विजांचा  कडकडाट ....  पावसाच्या  ह्या सरी....  अन  तुझ्या  त्या  गोड  आठवणी ....  पावसाच्या  ह्या  सरी  आहे  एक गोड  परी  पावसाची  रिमझिम  रानीवनी  ग ....  जाग्या  झाल्या  तुझ्या  गोड  आठवणी  ग ....  पहिल्यांदाच  पाहिले  मी तुला  हृदयी  फुलली  एक  नाजुक  कळी  विसरुनी  गेलो  मी  मला  उमलता  ती प्रेम  कळी  तुझ्या  त्या  नाजूक  आठवणींनी  ग...

☺आठवण ☺

☺आठवण ☺ विसरलीस तू  मला  तरीही  मी  नाही  तुला  विसरणार  ढगातून  येणाऱ्या  पावसाच्या  धारा  पाहायचं  मी  नाही सोडणार.......   नाही  आली  माझी  आठवण  तरीही  चालेल  पण  तुझी  आठवण  काढायला  मी  नाही  विसरणार  मुसळधार त्या  अमृतधारांमध्ये  भिजण्याचं  मी  नाही  सोडणार .......  नाही  माझ्या  सुखात  सामील  झालीस  तरीही  चालेल  पण  तुझ्या  सुखात  सामील  होण्याचं  मी  नाही  सोडणार  माझा तो आनंद  पावसात  जाऊन   व्यक्त  करण्याचं  मी नाही  सोडणार.......   नाही  माझ्या  दुःखात  सामील  झालीस  तरीही  चालेल  पण  तुझ्या  दुःखात  सामील  होण्याचं  मी  नाही  सोडणार  माझे  ते  अश्रू  प...
☺दाता - परमेश्वर ☺ तूच  आहेस  सखा  तूच  आहेस  सर्वस्व  तुझ्यामध्येच  सामावलेलं  आहे  प्रत्येकाचं  विश्व  कोणास कसा जन्म  दयायचा  हे  आहे  तुझ्याच  हाती  त्यातूनच  निर्माण  झाली  आगळी-वेगळी  नाती  म्हणतात  जन्माला  येतानाच  नशीब  सोबत  येतं  जगी  सर्वकाही  हे  तुझ्या  म्हणण्याप्रमाणेच  घडतं  प्रत्येकाला  देताना  तू  दिलंस  मन  किती छान  पण  आजच्या  युगात  काहींना  राहिलं  नाही त्याचं  भान  माणसाला  तू  दिलंस  मधुर  असं  मुख  मुक्या  प्राण्यांमध्ये  आहे  त्यांच्याहून  जास्त  सुख  कधी  कधी  शिणून  जीव  होतो अगदी नकोसा  आयुष्य  निर्माण  करण्याचा  तुझा  न्याय  आहे  तरी  कसा  मांडला  कसा  ...

हळवे मन

हळवे मन  मन  हे  माझे  हळवे  झाले  काय करावे  समजेना ? हळव्या  माझ्या  मनाला  काय  करावे  उमजेना ? परमेश्वराची  काय  ही  दृष्टी  बनवली  ही  सुंदर  सृष्टी  फळे - फुले  अन किलबिल  पाखरे  रंगीबेरंगी  ती  फुलपाखरे  निसर्गरम्य  त्या  दुनियेचा  अर्थ  मला  कळेना ? वर्षातील  हे  तीन  ऋतू  उन्हाळा , पावसाळा  अन  हिवाळा  चातक  पक्षाची  ती  प्रतीक्षा  अन  कोकीळ  पक्षाचा  तो  मंजुळ  गळा  पाखरांच्या  त्या  गुणगुणण्याचा  अर्थ  मला  कळेना ?  सूर्याची  ती  प्रखर  किरणं  अन  चंद्राचं  ते  शितल  असणं  आकाशाचं  विराट  दिसणं  अन  नभी  चमचमतं  चांदणं  प्रखर  अन  शितल  किरणांचा  अर्थ  मला कळेना ? अफाट  या...